कैसे करें ईस्टदेव का निर्धारण ?

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देवी – देवताओ, गुरुओ की पूजा, सत्संग, उपवास, सत्संग, दान व धार्मिक स्थानों की यात्रा के बाद भी मन अशांत / विचलित, पारिवारिक कलह, कर्ज, शारीरिक कष्ट रहता है। ज्योतिष के अनुशार हिन्दू धर्म मे तैंतीस करोड़ देवताओं की अलग – अलग शक्तियों के रूप पूजा की जाती है। परन्तु जब हम अपने ईस्टदेव की पूजा करते है, तो मन शांत रहकर जीवन की हर परेशानी मे अपने ईस्टदेव से मार्गदर्शन मिलता है।

ईस्टदेव निर्धारण.. जन्मपत्रिका के माध्यम से हम अपने ईस्टदेव के बारे मे जान सकते है। परन्तु कुंडली के आधार पर ईस्टदेव निर्धारण मे भी ज्योतिषो मे एक राय नहीं है। कुछ ज्योतिषी कुंडली के नवम भाव व उसके स्वामी गृह के आधार पर, कुछ होरोस्कोप के पंचम भाव व उसके स्वामी गृह के आधार पर, कुछ जन्मपत्री के लग्न भाव व उसके स्वामी गृह के आधार पर व जैमिनी ज्योतिष पद्धति मे जन्मकुंडली में स्थित नौ ग्रहों में जो ग्रह सबसे अधिक अंश पर हो उसी के आधार पर ईस्टदेव निर्धारण होता है।

हमारे मत (ज्योतिषाचार्य पंकज कुमार ) से ईष्टदेव का निर्धारण पूर्व जन्मो के कर्म के अनुशार होता है, जन्मपत्री के पंचम भाव से पूर्व जन्म के संचित धर्म, कर्म, ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, भक्ति, संतान, प्यार/ लगाव, विवेक का ज्ञान किया जाता है, इसलिए कुंडली के पंचम भाव से ही ईस्टदेव का निर्धारण करना चाहिए।

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