जानिए क्या हैं राहु??राहु की विशेषता , राहु का असर/प्रभाव और उपाय आदि

Rahu (1)
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ज्योतिष शास्त्र का एक ऐसा ग्रह जिसके नाम से लोगों को सर्वाधिक डर लगता है। जो इतना शक्तिशाली है की सूर्य और चन्द्र जैसे ग्रहों को भी ग्रहण लगा देता है।
नीलाम्बरो नीलवपु: किरीटी करालवक्त्र: करवालशूली। चतुर्भुजश्चक्रधरश्च राहु: सिंहाधिरूढो वरदोऽस्तु मह्यम॥

 

नवग्रहों में यह अकेला ही ऐसा ग्रह है जो सबसे कम समय में किसी व्यक्ति को करोड़पति, अरबपति या फिर कंगाल भी बना सकता है तथा इसी लिए इस ग्रह को मायावी ग्रह के नाम से जाना जाता है।
“अर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भ सम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ||”
राहु को जानिये – 1 (Rahu – Part 1)
    • खगोल विज्ञान के अनुसार राहु केतु का सौरमंडल में अपना कोई आस्तित्व नहीं है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार राहु और केतु सूर्य एवं चंद्र के परिक्रमा पथों के आपस में काटने के दो बिन्दुओं (Node) के द्योतक हैं। इसको पातबिंदु भी कहते हैं।
    • क्रांतिवृत्त / रविपथ / सूर्य पथ (वह आकाशीय रेखा है जिस पर हमे सूर्य भ्रमण करता हुआ प्रतीत होता है वास्तविक रूप में यह पृथ्वी का भ्रमण पथ है) और चन्द्र-पथ (जिस रास्ते से चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है) एक-दूसरे के समानांतर नहीं हैं और ये दोनों पथ एक-दूसरे को काटते हैं. जब चन्द्र पृथ्वी के चारो ओर चक्कर लगाते समय क्रांतिवृत्त को काटते हुए नीचे से ऊपर की ओर जाता है तो कटान बिंदु को राहू का नाम दिया गया है और इसको ‘आरोही-पात’ (Ascending Node)  भी कहते हैं.
    • प्रसिद्ध खगोलशास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट ने कहा कि पृथ्वी व चंद्र की छाया के कारण ग्रहण होता है। अर्थात्‌ पृथ्वी की बड़ी छाया जब चन्द्रमा पर पड़ती है तो चन्द्र ग्रहण होता है। इसी प्रकार चन्द्र जब पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है तो सूर्यग्रहण होता है। ज्योतिषशास्त्र इसी छाया को राहु-केतु मानता है इसी कारण राहु को छाया ग्रह कहा गया है।
    • छाया का हमारे जीवन में बहुत असर होता है। कहते हैं कि रोज पीपल की छाया में सोने वाले को किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता लेकिन यदि बबूल की छाया में सोते रहें तो दमा या चर्म रोग हो सकता है। इसी तरह ग्रहों की छाया का हमारे जीवन में असर होता है
यह हैं राहु की कथा —
जब समुद्रमंथन के बाद जिस समय भगवान विष्णु मोहिनी रूप में देवताओं को अमृत पिला रहे थे, उसी समय राहु देवताओं का वेष बनाकर उनके बीच में आ बैठा और देवताओं के साथ उसने भी अमृत पी लिया। परंतु तत्क्षण चंद्रमा और सूर्य ने उसकी असलियत बता दी।

अमृत पिलाते-पिलाते ही भगवान ने अपने तीक्ष्ण धारवाले सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट डाला। भगवान विष्णु के चक्र से कटने पर सिर राहु कहलाया और धड़ केतु के नाम से प्रसिद्ध हुआ। परंतु अमृत का संसर्ग होने से वह अमर हो गया फलस्वरूप ब्रह्माजी ने उसे ग्रह बना दिया। तभी से अन्य ग्रहों के साथ राहु भी ब्रह्मा की सभा में बैठता है।

ऐसा हैं राहु का स्वरुप –
  1. राहु की माता का नाम सिंहिका है, जो विप्रचित्ति की पत्नी तथा हिरण्यकशिपु की पुत्री थी। माता के नाम से राहु को सैंहिकेय भी कहा जाता है।
  2. पौराणिक कथाओं के अनुसार राहु का मुख भयंकर है। राहु को सांप का मुख कहा गया है। ये सिर पर मुकुट, गले में माला तथा शरीर पर काले रंग का वस्त्र धारण करते हैं। इनके हाथों में तलवार, ढाल, त्रिशूल और वरमुद्रा है। राहु सिंह के आसन पर विराजमान हैं। मत्स्यपुराण के अनुसार राहु का रथ अंधकार रूप है। इसे कवच आदि से सजाए हुए काले रंग के आठ घोड़े खींचते हैं।
जानिए राहु की विशेषता–
ईष्ट देवी : सरस्वती
रंग : नीला , काला
नक्षत्र : आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा
गुण : सोचने की ताकत, डर, शत्रुता
शक्ति : कल्पना शक्ति का स्वामी, पूर्वाभास तथा अदृश्य को देखने की शक्ति।
शरीर का भाग : ठोड़ी, सिर, कान, जिह्वा
पशु : काँटेदार जंगली चूहा, हाथी, बिल्ली व सर्प
वृक्ष : नारियल का पेड़, कुत्ता घास
वस्तु : नीलम, सिक्का, गोमेद, कोयला
फूल : नीले

दिशा : नैऋत्य कोण
दिशा : नैऋत्य कोण

  1. बुध ग्रह हमारी बुद्धि का कारण है, लेकिन जो ज्ञान हमारी बुद्धि के बावजूद पैदा होता है उसका कारण राहु है. जैसे मान लो कि अकस्मात हमारे दिमाग में कोई विचार आया या आइडिया आया तो उसका कारण राहु है। राहु हमारी कल्पना शक्ति है तो बुध उसे साकार करने के लिए बुद्धि कौशल पैदा करता है।
  2. यह ग्रह वायु तत्व म्लेच्छ प्रकृति तथा नीले रंग पर अपना विशेष अधिकार रखता है।
  3. ध्वनि तरंगों पर राहु का विशेष अधिकार है।
  4. राहु-केतु का स्वतंत्र प्रभाव नहीं होता है। वे जिस राशि में या जिस ग्रह के साथ बैठते हैं, उसके अनुसार प्रभाव दिखाते हैं।
  5. जातक पारिजात के अनुसार जो ग्रह राहु के साथ बैठा हो वह शुभ फल नहीं देता। राहु जिस राशि में बैठा हो तो उसका स्वामी अच्छा फल नहीं देता है। राहु राशिपति के गृह में जो ग्रह बैठा है वह अच्छा फल नहीं देता ।
  6. मीन राशि में गया राहु हमेशा कष्टकारी होता है.

राहु के कारक –

दादा, वाणी की कठोरता, खोजी, प्रवृत्ति, विदेश प्रवास भ्रमण, अभाव, चमड़ी पर धब्बा, त्वचा रोग, सांप के काटने, जहर, महामारी, पर स्त्री से संबंध, नाना-नानी, निरर्थक तर्क-वितर्क, कपट, धोखे, वैधव्य, दर्द और सूजन, ऊंची आवाज से कमजोरों को दबाने, और दिल को ठेस पहुंचाने की प्रवृत्ति, अंधेरे, चुगलखोरी, पाखंड, बुरी आदतों, भूख व डर से दिल बैठने की अवस्था, अंग-भंग, कुष्ठ रोग, ताकत, खर्चे, मान-मर्यादा, शत्रु, देश से निस्कासन, तस्करी, जासूसी, आत्महत्या, शिकार, गुलामी, पत्थर .

राहु शिव के अनन्य भक्त हैं। एक श्लोक में इन्हें भगवान नीलकण्ठ के ह्वदय में वास करने वाला कहा गया है-
कालदृष्टि कालरूपा: श्रीकण्ठ: ह्वदयाश्रय:। विद्युन्तदाह: सैहिंकयो घोररूपा महाबला: || 
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