Daily Panchang for 21st September 2018

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आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞
⛅ दिनांक 21 सितम्बर 2018
⛅ दिन – शुक्रवार
⛅ *विक्रम संवत – 2075
⛅ शक संवत -1940
⛅ अयन – दक्षिणायन
⛅ ऋतु – शरद
⛅ मास – भाद्रपद
⛅ पक्ष – शुक्ल
⛅ तिथि – द्वादशी 22 सितम्बर प्रातः 03:40 तक तत्पश्चात त्रयोदशी
⛅ नक्षत्र – श्रवण दोपहर 04:46 तक तत्पश्चात धनिष्ठा
⛅ योग – सुकर्मा 22 सितम्बर प्रातः 03:23 तक तत्पश्चात धृति
⛅ राहुकाल – सुबह 10:49 से दोपहर 12:19 तक
⛅ सूर्योदय – 06:15
⛅ सूर्यास्त – 18:24
⛅ दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण – वामन जयंती
💥 विशेष – द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
💥 स्कंद पुराण के अनुसार द्वादशी के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।
🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 ज्योतिष शास्त्र 🌷
🙏🏻 23 सितंबर, रविवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होता है व घरों व सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन विसर्जन से पहले नीचे बताए गए छोटे-छोटे उपाय किए जाएं तो सभी की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
➡ पैसा नौकरी बिजनेस हर समस्या का हल है ये उपाय
👉🏻 भगवान श्री गणेश को पूजा में रेशमी दुपटटा चढ़ाएं। दाम्पत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ेगा।
👉🏻 भगवान श्री गणेश को पांच तरह के लड्डुओं का भोग लगाएं। भौतिक सुख-सुविधाएं मिलेंगी।
👉🏻 श्री गणेश का अभिषेक गाय के कच्चे दूध (बिना उबला) से करें। धन की कमी पूरी होगी।
👉🏻 स्फटिक से बनी श्री गणेश की मूर्तियाँ भक्तों को बांटें। समाज में मान-सम्मान मिलेगा।
👉🏻 श्री गणेश को ताजी, हरी दूर्वा चढ़ाएं। मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होगी।
👉🏻 श्री गणेश को सिंदूर चढ़ाएं। ऑफिस और परिवार में चल रही समस्याएं समाप्त होंगी।
👉🏻 आम के पत्तों से भगवान श्री गणेश की पूजा करें। सभी तरह के रोग ठीक होने लगेंगे।
👉🏻 भगवान श्री गणेश को गुड, चीनी और दही का भोग लगाएं। आने वाले संकटों से बचेंगे।
👉🏻 भगवान श्री गणेश का पंचामृत से अभिषेक करें। पैसों से संबंधित फायदा होने के योग बन सकते हैं।
👉🏻 तांबे के सिक्के को काले धागे में बांधकर श्री गणेश को चढ़ाएं। धन लाभ होगा।
👉🏻 भगवान श्री गणेश को गुलाब के 21 फूल चढ़ाएं। संतान संबंधी समस्या का निदान होगा।
👉🏻 पीले रेशमी कपड़ा भगवान श्री गणेश को अर्पित करें। नौकरी व व्यापार में लाभ होगा।
🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞

🌷 वामन द्वादशी 🌷
🙏🏻 भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी या वामन जयंती कहते हैं। श्रीमद्भागवत के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान वामन का प्राकट्य हुआ था। इस बार वामन द्वादशी 21 सितंबर, शुक्रवार को है। धर्म ग्रंथों में वामन को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। वामन द्वादशी का व्रत इस प्रकार करें-
🌷 व्रत व पूजा विधि 🌷
वैष्णव भक्तों को इस दिन उपवास करना चाहिए। सुबह स्नान आदि करने के बाद वामन द्वादशी व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दोपहर (अभिजित मुहूर्त) में भगवान वामन की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद एक बर्तन में चावल, दही और शक्कर रखकर किसी योग्य ब्राह्मण को दान करना चाहिए।
शाम के समय व्रती (व्रत करने वाला) को फिर से स्नान करने के बाद भगवान वामन का पूजन करना चाहिए और व्रत कथा सुननी चाहिए। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए और स्वयं फलाहार करना चाहिए। इस तरह व्रत व पूजन करने से भगवान वामन प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
🌷 वामन जयंती की प्रामाणिक कथा 🌷
🙏🏻 एक बार दैत्यराज बलि ने इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। पराजित इंद्र की दयनीय स्थिति को देखकर उनकी मां अदिति बहुत दुखी हुईं। उन्होंने अपने पुत्र के उद्धार के लिए विष्णु की आराधना की।
🙏🏻 इससे प्रसन्न होकर विष्णु प्रकट होकर बोले- देवी! चिंता मत करो। मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को उसका खोया राज्य दिलाऊंगा। समय आने पर उन्होंने अदिति के गर्भ से वामन के रूप में अवतार लिया। उनके ब्रह्मचारी रूप को देखकर सभी देवता और ऋषि-मुनि आनंदित हो उठे।
🙏🏻 एक दिन उन्हें पता चला कि राजा बलि स्वर्ग पर स्थायी अधिकार जमाने के लिए अश्वमेघ यज्ञ करा रहा है। यह जानकर वामन वहां पहुंचे। उनके तेज से यज्ञशाला प्रकाशित हो उठी। बलि ने उन्हें एक उत्तम आसन पर बिठाकर उनका सत्कार किया और अंत में उनसे भेंट मांगने के लिए कहा।
🙏🏻 इस पर वामन चुप रहे। लेकिन जब बलि उनके पीछे पड़ गया तो उन्होंने अपने कदमों के बराबर तीन पग भूमि भेंट में मांगी। बलि ने उनसे और अधिक मांगने का आग्रह किया, लेकिन वामन अपनी बात पर अड़े रहे। इस पर बलि ने हाथ में जल लेकर तीन पग भूमि देने का संकल्प ले लिया। संकल्प पूरा होते ही वामन का आकार बढ़ने लगा और वे वामन से विराट हो गए।
🙏🏻 उन्होंने एक पग से पृथ्वी और दूसरे से स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना मस्तक आगे कर दिया। वह बोला- प्रभु, सम्पत्ति का स्वामी सम्पत्ति से बड़ा होता है। तीसरा पग मेरे मस्तक पर रख दें। सब कुछ गंवा चुके बलि को अपने वचन से न फिरते देख वामन प्रसन्न हो गए। उन्होंने ऐसा ही किया और बाद में उसे पाताल का अधिपति बना दिया और देवताओं को उनके भय से मुक्ति दिलाई।

📖 *हिन्दू पंचांग संपादक ~ आचार्य अरुणा दाधीच जयपुर 9983974145

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